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<title>  لالایی ها . افسانه ها . دروغ ها  </title>
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<description>دل نوشته هاي يك ارديبهشتي</description>
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<title>خواب سرد</title>
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<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;دل سپردم به فردايي كه غرق تنهاییست&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;جان مي سپارم در آغوش خاكي سرد، در حسرت آفتاب...&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;پرنيان خيالم، آسوده بخواب!خورشيد در راه است...&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Sun, 01 Nov 2009 17:28:18 GMT</pubDate>
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<title></title>
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<description>&lt;STRONG&gt;من مردم. . .&lt;/STRONG&gt;</description>
<pubDate>Mon, 05 Oct 2009 17:32:21 GMT</pubDate>
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<title></title>
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<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;مي پنداشتم، كه بدي در تاريكست.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;ولي اكنون در روز روشن ،بدي را ميبينم.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT color=#333333&gt; به سوي شب زبانه مي كشد&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;تنهايي ملال آور آسمان؛&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;و دهان باز تاريكي!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt;&lt;FONT color=#333333&gt;چه شرمساري بزرگيست سياهي روز ...&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl align=right&gt; &lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Fri, 02 Oct 2009 16:06:18 GMT</pubDate>
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<title>چشمان تو</title>
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<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;در پست نوشته هاي من &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;چشمان سياه توست&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;كه مي نگرد وميخواند مرا&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;از هر راه كه مي روم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;به نوشتن چند شعر مي رسم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;به زانو در مي آيم&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;در مقايل روز در مقابل شب&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;نوشتنم ،نوعي سخن است  با خود &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;وتنهايي را با كلمات پز ميكند.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;بياد مي آورم، همه گفته ها را&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;كه در هيچ دريايي، نمي گنجد ...&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Wed, 23 Sep 2009 07:37:18 GMT</pubDate>
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<title>مادر بچه هاي هابيلو قابيل چه كسيست؟</title>
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<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#ff6600&gt;توجه :&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;&quot; در دین زرتشتی وجودی به نام آدم و حوا و وسوسه ی حوا و چیدن گیاه ممنوعه و جریانات آن وجود ندارد و اعتقاد بر این است که بعد از کیومرث، مشیه و مشیانه از ریشه ی یک گیاه (اکثراً می‏گویند ریواس) به وجود آمدند و بالیدن و زندگی را نیک آغاز کردند. &quot;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;BR&gt;&lt;FONT color=#666666&gt; اين هميشه موضوع جالبي بود كه مدتها ذهن منو مشغول كرده بود  تا به طور اتفاقي به اين مطلب رسيدم. وحالا موندم كه كي راست ميگه ؟! كدوم درستره؟! بماند كه اغلب ذكر شده كه رواييت هاي دين زرتشت  اسطوره و افسانه لي بيش نيست.از كجا معلوم كه در كتاب ما هم دخل تصرف اينچنيني شده باشه؟!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;درك اين موضوع هنوز برام جا نيوفتاده كه آگه  آدمو حوا كه به وجود اومد  حالا جدا از  خلاف كاريشون ،مگه غير اين بود كه دوپسر  بنام هابيل و قابيل به دنيا آوردن؟! اين هابيل و قابيل با كي ازدواج كردن  كه اين نسل  آدمي زاد كره زمينو  بيچاره كرد؟مگر جز &quot;حوا&quot;  زني كه  فرشته نبود و زميني بود زن ديگه اي هم وجود داشت؟!شايدم با خواهراشون ...&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;در پيگيري اين سئوال به اين جواب و نتيجه در يك سايت رسيدم:&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;  &lt;/FONT&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;&quot; یَا أَیُّهَا النَّاسُ اتَّقُوا رَبَّكُمُ الَّذِی خَلَقَكُم مِن نَفْسٍ وَاحِدَةٍ وَخَلَقَ مِنْهَا زَوْجَهَا وَبَثَّ مِنْهُمَا رِجَالاً كَثِیراً وَنِسَاءً...»1&lt;BR&gt;از ظاهر این آیه و آیات متعدد2 دیگر استفاده می‌شود كه مراد از «نفس واحده» آدم(ع) و مراد از «زوجها» حوا می‌باشد كه پدر و مادر نسل انسان است و همه‌ی افراد نوع انسان به این دو تن منتهی می‌شوند. و از تعبیر «وَبَثَّ مِنْهُمَا رِجَالاً كَثِیراً وَنِسَاءً» به دست می‌آید كه نسل موجود انسان، تنها به آدم و همسرش منتهی می‌شود و جز این دو نفر، هیچ كس دیگری در انتشار این نسل دخالت نداشته (نه حوری بهشتی، و نه فردی از افراد جن و نه غیر آن دو) وگرنه می‌فرمود و بث منها و من غیرهما.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;بنابراین نتیجه می‌گیریم كه:&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;BR&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;1. منظور از رجالاً كثیراً و نساءً كل بشر است و افراد بی‌واسطه مثل هابیل و قابیل و غیره و یا با واسطه مثل فرزندان هابیل و قابیل تا انسان‌های امروزی تا روز قیامت از آدم و حوا منشعب شده‌اند.&lt;BR&gt;2. ازدواج در طبقه اول بعد از خلقت آدم و حوا یعنی در فرزندان بدون واسطه آنها بین خواهران و برادران بوده است یعنی دختران آدم و حوا با پسران آنها ازدواج كرده‌اند؛ چون در آن روز در تمام عالم نسل بشر منحصر در همین فرزندان بوده است و هیچ اشكالی ندارد چون مساله یك مساله تشریعی است و تشریع تنها كار خدا است او می‌تواند براساس مصلحت و ضرورت، عملی را زمانی حلال كند و در زمان دیگر براساس حكمت حرام كند&quot;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;خداكه  می‌تواند براساس مصلحت و ضرورت، عملی را زمانی حلال كند و در زمان دیگر براساس حكمت حرام كند! مگه خدا نمي تونست  دوتا  خانواده  خلق كنه  ؟! كه مجبور باشه اين همه دور ازجون ادم حرومزاده بريزه رو كره خاكي!!!اصلا این  فلسفه حرام و حلال زاده چیه؟ نمي دونم اينا حكمت خدا يا حكمت دست كاري شده انساني؟! نمي دونم !!! شايد سوادم تا اونجاها ديگه قد نميده شايدم قدري ... !!!&lt;BR&gt;&lt;BR&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Wed, 09 Sep 2009 07:07:18 GMT</pubDate>
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<title>د.ر.و.غ</title>
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<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;FONT color=#ff6600&gt;د&lt;/FONT&gt;&lt;/STRONG&gt; مثل : دروغ &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;FONT color=#ff6600&gt; آ&lt;/FONT&gt;&lt;/STRONG&gt; مثل : آدم دروغگو&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; از اين دو واژه، فاجعه آميزتر و رنج آورتر وجود دارد؟&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#ff6600&gt;پ.ن&lt;/FONT&gt;: &lt;FONT color=#666666&gt;جو&lt;EM&gt;اب دروغ سكوتست يا اشكي باصداقت؟&lt;/EM&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;EM&gt; ؟؟&lt;/EM&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;EM&gt;&lt;/EM&gt; &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Wed, 02 Sep 2009 20:56:18 GMT</pubDate>
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<title>خانه صادق هدایت كه دیدن ندارد!</title>
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<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;یكی از دوست‌داران &lt;STRONG&gt;&lt;FONT color=#ff6600&gt;صادق هدایت&lt;/FONT&gt;&lt;/STRONG&gt; از دزفول كوبیده و آمده بود تهران كه برود خانه این نویسنده پر افتخار ایران را ببیند. طبعا رفته بود به خیابان كوشك و به بیمارستان امیر اعلم مراجعه كرده بود. بعد از اصرار زیاد و من بمیرم تو بمیری فقط حیاط كوچكی از خانه را به او نشان داده بودند كه شنیدم محل انباشته كردن زباله است و در وضع مناسبی نگه‌داری نمی‌شود.&lt;/FONT&gt;&lt;FONT color=#666666&gt; به هر تقدیر اجازه ندادند بقیه خانه هدایت را ببینند و گفته بودند كه باید از فلان‌كس اجازه بگیری او هم نیست و معلوم نیست كی می‌آید خلاصه جوان دزفولی را سنگ‌قلاب كرده و پس فرستادند به دزفول.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt; اما نكته گفتنی آن است كه در حین بازدید ناقص و نیمه‌كاره یكی از متصدیان بیمارستان این بازدید كننده را ارشاد می‌كند كه:&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;&quot; &lt;STRONG&gt;مگر بیكاری بلند شده‌ای  از دزفول آمده‌ای   تهران كه خانه صادق هدایت را ببینی؟ بسیار جاهای دیدنی‌تراز خانه این مرد پوچ‌گرا هست كه جنبه مذهبی دارند كه باید بروی آن‌ها را ببینی خانه صادق هدایت كه دیدن ندارد. نه خودش دیدن داشت نه خانه‌اش و چه بهتر كه در آن را بسته‌اند و دیدن آن‌هم گذشتن از هفت‌خوان رستم است و نه تنها مردم این مملكت بلكه مردم دنیا نمی‌توانند آن را ببینند. بقول این جوان دزفولی زباله از آن حیاط كوچك به هر جای خانه سرایت كرده است&lt;/STRONG&gt;.&quot;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt; چند پیشنهاد دارم:&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt; &lt;STRONG&gt;اولا:&lt;/STRONG&gt; تمام  كسانی را كه برای دیدن خانه صادق هدایت مراجعه می‌كنند نزد این خانم بفرستند كه آن‌ها را ارشاد كند. ما چهار تا راهنمای درست حسابی مثل این خانم داشته باشیم توی این مملكت از شدت هجوم توریست و بازدید‌كننده سوزن نمی‌شود انداخت.&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;&lt;STRONG&gt; ثانیا:&lt;/STRONG&gt; اگر یك وقتی، یك روزی قرار شد این محل خانه صادق هدایت به معنای كلمه باشد همین خانم را بگذارید مدیر روابط‌عمومی این مركز فرهنگی كه فعالیت فرهنگی و ادبی خود را در ابعاد وسیع‌تر و سازنده‌تری معمول دارند &lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;&lt;STRONG&gt;و ثالثا‌:&lt;/STRONG&gt; اگر خارجی‌های بیكار آمدند این خانه را ببینند این خانم را  راهنمای آن‌ها قرار بدهید كه برای مملكت واقعا اعتبار و آبروی فرهنگی بیشتری در انظار خارجی‌ها فراهم بكند و از بازدید خود خاطره خوش و خرمی داشته باشند. حال سازمان مستقل جهانگردی و میراث فرهنگی شكل گرفته باید در‌به‌در دنبال چنین كارشناسان قابل و ورزیده‌ای بگردیم كه در كار خود واقعا تبحر دارند. &lt;/FONT&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;وقتی همین‌طوری برای رضای خدا جوان دزفولی را راهنمایی می‌كنند و می‌خواهند او را از تفكر غلط خود بیرون كشیده و از بازدید خانه هدایت منصرف كنند و راه درست را به او نشان بدهند اگر در زمینه راهنمائی توریست‌ها هم چنین وظیفه‌ا‌ی ‌به آن‌ها محول شود شاهكار می‌كنند&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666 size=1&gt;نويسنده:جهانگير هدايت&lt;/FONT&gt;&lt;SPAN class=title&gt;&lt;SPAN id=lblAuthor&gt; &lt;/SPAN&gt;&lt;BR&gt;&lt;/P&gt;&lt;/SPAN&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#ff6600&gt;پ.ن : &lt;/FONT&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;خواندم و افسوس خوردم به حال صادق ! ولی خوشحال شدم از اینکه نیست تا اوضاع الان را ببیندو اگر نويسنده دوران اخير بود احتمالا خيلي زود تر خودش را خلاص ميكرد...&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Mon, 31 Aug 2009 15:25:18 GMT</pubDate>
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<item>
<title>قاصدك</title>
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<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl style=&quot;MARGIN-LEFT: 0px&quot;&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;ميداني! اين روزها، بوي فاصدك هاي سوخته به مشام ميرسد ...&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;شايد، چون ققنوس ها دست به  خود سوزي زده باشند!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt; شايد در پرواز بي احتياطي كرده اند و  به خورشيد، نزديك شده باشند!!&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;شايد . شايد . شايد....&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;&lt;/FONT&gt; &lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Mon, 24 Aug 2009 06:57:24 GMT</pubDate>
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</item>
<item>
<title></title>
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<description>&lt;BLOCKQUOTE dir=rtl&gt;
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;STRONG&gt;&lt;FONT color=#ff9900&gt; اینم یه داستان هدیه ای از یک دوست:&lt;/FONT&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P dir=rtl&gt;&lt;FONT color=#ff6600&gt;&quot; &lt;/FONT&gt;&lt;FONT color=#3300ff&gt; &lt;/FONT&gt;&lt;FONT color=#666666&gt;به روايت افسانه‌ها روزي شيطان همه جا جار زد كه قصد دارد از كار خود دست بكشد و وسايلش را با تخفيف مناسب به فروش بگذارد.&lt;BR&gt;او ابزارهاي خود را به شكل چشمگيري به نمايش گذاشت. اين وسايل شامل خودپرستي، شهوت، نفرت، خشم، آز، حسادت، قدرت‌طلبي و ديگر شرارت‌ها بود.&lt;BR&gt;ولي در ميان آنها يكي كه بسيار كهنه و مستعمل به نظر مي‌رسيد، بهاي گراني داشت و شيطان حاضر نبود آن را ارزان بفروشد.&lt;BR&gt;&lt;BR&gt;كسي از او پرسيد: اين وسيله چيست؟&lt;BR&gt;&lt;BR&gt;شيطان پاسخ داد: اين &lt;B&gt;&lt;FONT color=#ff9900&gt;نوميدي&lt;/FONT&gt;&lt;/B&gt; ا‌ست&lt;BR&gt;&lt;BR&gt;آن مرد با حيرت گفت: چرا اين قدر گران است؟&lt;BR&gt;&lt;BR&gt;شيطان با همان لبخند مرموزش پاسخ داد: چون اين مؤثرترين وسيلة من است. هرگاه ساير ابزارم بي‌اثر مي‌شوند، فقط با اين وسيله م ي‌توانم در قلب انسان‌ها رخنه كنم و كاري را به انجام برسانم. اگر فقط موفق شوم كسي را به احساس نوميدي، دلسردي و اندوه وا دارم، مي‌توانم با او هر آنچه مي‌خواهم بكنم..&lt;BR&gt;من اين وسيله را در مورد تمامي انسان‌ها به كار برده‌ام. به همين دليل اين &lt;FONT color=#ff9900&gt;&lt;STRONG&gt;قدرت كهنه&lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt; است&lt;STRONG&gt; &lt;FONT color=#ff9900&gt;&quot;&lt;/FONT&gt;&lt;/STRONG&gt;&lt;/FONT&gt;&lt;/P&gt;&lt;/BLOCKQUOTE&gt;</description>
<pubDate>Sat, 22 Aug 2009 16:47:18 GMT</pubDate>
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<item>
<title></title>
<link>http://paeize-man.blogfa.com/post-93.aspx</link>
<description>&quot;من از خدا خواستم که پلیدی های مرا بزداید. 
&lt;P&gt;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;خدا گفت : نه&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; آنها برای این در تو نیستند که من آنها را بزدایم .بلکه آنها برای این در تو هستند که تو در برابرشان پایداری کنی.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;من از خدا خواستم که بدنم را کامل سازد.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;خدا گفت : نه&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; روح تو کامل است . بدن تو موقتی است .&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;من از خدا خواستم به من شکیبائی دهد.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;خدا گفت : نه&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; شکیبائی بر اثر سختی ها به دست می آید. شکیبائی دادنی نیست بلکه به دست آوردنی است.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;من از خدا خواستم تا به من خوشبختی دهد.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; خدا گفت : نه  &lt;/P&gt;
&lt;P&gt; من به تو برکت می دهم،خوشبختی به خودت بستگی دارد.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;من از خدا خواستم تا از درد ها آزادم سازد.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; خدا گفت : نه&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; درد و رنج تو را از این جهان دور کرده و به من نزدیک تر می سازد. &lt;/P&gt;
&lt;P&gt;من از خدا خواستم تا روحم را رشد دهد.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; خدا گفت : نه&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; تو خودت باید رشد کنی ولی من تو را می پیرایم تا میوه دهی.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; من از خدا خواستم به من چیزهائی دهد تا از زندگی خوشم بیاید.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;خدا گفت : نه&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;من به تو زندگی می بخشم تا تو از همۀ آن چیزها لذت ببری.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;من از خدا خواستم تا به من کمک کند تا دیگران را همان طور که او دوست دارد ، دوست داشته باشم.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;خدا گفت : ... سرانجام مطلب را گرفتی.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;برای دنیا تو ممکن است فقط یک نفر باشی ولی برای یک نفر، تو ممکن است به اندازۀ دنیا ارزش داشته باشی.&lt;/P&gt;
&lt;P&gt;داوری نکن تا داوری نشوی . آنچه را رخ می دهد درک کن . برکت خواهی یافت.&quot;&lt;/P&gt;
&lt;P&gt; &lt;/P&gt;</description>
<pubDate>Sat, 01 Aug 2009 13:58:18 GMT</pubDate>
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